Volcanic Meaning in Hindi | Jwalamukhi in Hindi | jwalamukhi Kise Kahate hai ?

Jwalamukhi in Hindi | Volcanic Meaning in Hindi | jwalamukhi Kise Kahate hai ?

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ज्वालामुखी किसे कहते हैं, ज्वालामुखी क्या होता है, Jwalamukhi in Hindi मूल मंत्र, क्या है, फिल्म, मंदिर, प्रकार (jwalamukhi Kise Kahate hai in Hindi) (Prakar, Types, Mandir) (jwalamukhi Movie, Jwalamukhi Picture, Jwalamukhi Mandir, Jwalamukhi ki Jankari )

ज्वालामुखी किसे कहते हैं और इसके निकल ने किस स्थान को क्या कहते हैं जमीन का वह स्थान होता है जहां से पृथ्वी के नीचे स्थित पिघली हुई चट्टाने जिसे हम मैग्मा के नाम से जानते हैं और पृथ्वी की सतह पर उस मैग्मा का आना ज्वालामुखी (Jwalamukhi in Hindi UPSC) कहलाता है मैग्मा यानी लावा जमीन पर आने के बाद लावा कहलाता है लावा जो ज्वालामुखी में मुख्य तौर पर और उसके आसपास बिखर कर एक ठोस चट्टान का निर्माण करता है जैसा कि हम नीचे दी गई जानकारी के रूप में आपको बताएंगे और आप इस चित्र को देख सकते हैं

ज्वालामुखी क्या होता है

पृथ्वी के नीचे दबे अलावे को ज्वालामुखी (Jwalamukhi information in Hindi) कहते हैं ज्वालामुखी एक ऐसी सदा है जहां गर्म पदार्थ यानी लावा और इसका दूसरा नाम मैग्मा अन्य गैस से होती हैं जिसके अंदर भारी मात्रा में गैस उत्पन्न होती है जो पृथ्वी के वातावरण में आने की संभव प्रयास करती हैं जब पृथ्वी की सतह के नीचे गैस का दबाव अधिक हो जाता है तो वह गैस अपना रास्ता बनाती हैं और गैस बाहर निकल जाती हैं जब गैस बाहर निकलती है तो भयानक विस्फोट होता है इसको ज्वालामुखी का फटना कहते हैं जिसके बाद जब भी यह पदार्थ इस ज्वालामुखी से बाहर निकलते हैं तो बड़ा विस्फोट का कारण बनते हैं और आसपास के क्षेत्र में लावा और राख का बादल बन जाता है इनके विस्फोट होने से तरह-तरह की गैस से उत्पन्न होती हैं और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती हैं

लावा यानी मैग्मा किसे कहते हैं

ज्वालामुखी के फटने के बाद जो पदार्थ बाहर निकलता है उसे लावा कहते हैं या मैग्मा के रूप में हमें दिखाई देता है इस कारण लाल होता है और तापमान अधिक होने की वजह से हमें पीला रंग भी दिखाई देता है यह सब चट्टानों के पिघलने से संभव होता है इसलिए इसके आसपास और कई ज्वालामुखी उत्पन्न हो सकती हैं वहां पर रहना बहुत ही ज्यादा खतरनाक होता है जहां पर ज्वालामुखी के बार-बार विस्फोट होते हैं और ऐसा लावा या मैग्मा नई चट्टानों का निर्माण करता है जो हमें पहाड़ों के रूप में दिखाई पड़ते हैं

ज्वालामुखी मैग्मा कब निकलता है

पृथ्वी के केंद्र भाग में तापमान और गैसों का मिश्रण अधिक होने से तथा गैस का यह दबाव होने से यह लावा पृथ्वी की बाहरी सतह पर आता है इसे ज्वालामुखी के रूप में देखा जाता है पृथ्वी के नीचे यह एक तालाब की तरह होता है जिसकी कोई सीमा नहीं होती है और गैसों का दबाव बढ़ने के कारण यह कभी भी विस्फोट हो सकती हैं

ज्वालामुखी के बारे में याद रखें यह बातें

  • ज्वालामुखी दो प्रकार की होती हैं सजीव ज्वालामुखी और मृत ज्वालामुखी जब तक उससे गैस बाहर आती है ऐसे ज्वालामुखी को सजीव ज्वालामुखी कहते हैं और यदि कोई ज्वालामुखी 10000 सालों से निष्क्रिय रहती है यानी उसके अंदर कोई भी विस्फोट आधी नहीं होता है तो उसे मृत ज्वालामुखी कहा जाता हैकिसी ज्वालामुखी के फटने से जो विस्फोट होता है उससे मैग्मा के उत्सर्जन करती और ज्वालामुखी के फटने से जो कैसे उत्पन्न होती हैं जिसमें मैग्मा बहुत अधिक मात्रा में जल और कार्बन डाइऑक्साइड मौजूद होता हैज्वालामुखी से जब मैग्मा आभार आता है तो अपने मूल आकार से हजार गुना बड़ा हो जाता है कुछ ज्वालामुखी कैसे होते हैं जोकि आकार में छोटे होते हैं और कुछ ऐसे ज्वालामुखी होते हैं जो बहुत गहरे पानी से भरे होते हैं और ज्वालामुखी की अलग-अलग आकृतियों और चित्रों के आधार पर इसे तीन अलग नामों से जाना जाता है जोकि निम्नलिखित है

शील्ड ज्वालामुखी(Shield volcano):-

यदि मैडम आप बहुत अधिक गर्म हो और बहुत तेज गति से पृथ्वी से बाहर निकल रहा हो तो विस्फोट होने की संभावना सबसे अधिक होती है इससे जब नगमा निकलता है बाहर तो वह बहुत अधिक मात्रा में होता है जब इस तरह की ज्वालामुखी के नगमा का तापमान लगभग 800 से 1200 सेल्सियस के मध्य होता है

सम्मिश्रित (कम्पोजिट) ज्वालामुखी(Composite Volcano):-

इस तरह की ज्वालामुखी को हम केंद्रीय ज्वालामुखी के रूप में जानते हैं यानी स्त्रोत ज्वालामुखी के नाम से भी हम इसे जानते हैं इस तरह के ज्वालामुखी में एक मुख्य विशेषता यह होती है कि जब भी कोई ज्वालामुखी विस्फोट होता है तो उसके अंदर से मैग्मा निकलता है लेकिन मैग्मा का तापमान थोड़ा कम हो जाता है यानी यह धीरे-धीरे जमने लगता है और गैस को फैला कर बाहर निकाल देता है जिससे गैस को बाहर निकलने में कोई दिक्कत नहीं आती है फल स्वरुप भूमि के नीचे से आने वाली मैग्मा बहुत अधिक शक्ति के साथ बाहर निकलता है और विस्फोट होता है इस तरह के ज्वालामुखी मैं निश्चित तौर से लावा बहता है जिसे लावा की लहर के नाम से जाना जाता है

काल्डेरा ज्वालामुखी(Caldera Volcano):-

जब भी ज्वालामुखी में ऐसा विस्फोट होता है तो लावा अधिकांश हिस्सा ज्वालामुखी के मुख पर जम जाता है और जब ज्वालामुखी का आकार एक बेसिन की तरह हो जाता है और ज्वालामुखी से लावा जब बाहर आता है तो यह बहुत अधिक चिपचिपा होता है इसके अलावा बाकी ज्वालामुखी लावा जो भारी लावे से ठंडा होता है उसके संपर्क में आने से अंदर का लावा का तापमान में गिरावट आना शुरू हो जाती है इस तरह के नगमे का तापमान अनुमानित 600 से 850 डिग्री सेल्सियस होता है

दुनिया की 5 प्रसिद्ध ज्वालामुखी

दुनिया में कुछ ज्वालामुखी अपने आकार और अपनी विस्फोट था की वजह से दुनिया की सूची में सबसे प्रसिद्ध हैं हम आप को उनके बारे में संपूर्ण जानकारी देने की कोशिश करेंगे अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी है तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें जो कि निम्नलिखित हैं

हम आप का धन्यवाद करते हैं कि आपने यहां तक इस आर्टिकल को पढ़ लिया है तो हम यह विश्वास करते हैं कि आपको यह पसंद आया होगा इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें

— Ajay V.s

माउंट विसुवियस(Mount Vesuvius):-

दुनिया के सबसे प्रसिद्ध ज्वालामुखी में से एक यह ज्वालामुखी इटली में स्थित है यह कोन के आकार का ज्वालामुखी है यह ज्वालामुखी 80 से ज्यादा बार विस्फोट हो चुका है जिससे यह ज्वालामुखी दुनिया में बहुत प्रसिद्ध हो चुका है और विस्फोट के दौरान कैसे निकलती है पत्थर और राख जमीन से 33 किलोमीटर तक बहुत अधिक मात्रा में उड़ते हैं जिसे काले बादल प्रतीत होता हैये इस समय विश्व की सबसे खतरनाक ज्वालामुखी है क्योंकि इस ज्वालामुखी के आस पास लगभग तीस लाख की जनसँख्या निवास करती है. इसकी ऊंचाई 1281 मीटर की है. माउंट विसूवियस में आखिरी बार मार्च सन 1944 में विस्फोट हुआ था. इस विस्फोट में सन सेबेस्तानियन के कई गाँव ध्वंस हो गये|

माउंट रिज़( Mount Riz):-

सन 1985 में दक्षिण अमेरिका के कोलंबिया में इसके दो विस्फोट हुए थे.  विस्फोट के बाद इसके स्लोप पर कई छोटी नदियों का जल और कीचड़ बहने लगा. इस कीचड़ के नीचे आकर लगभग 30 मील के क्षेत्र में बसा शहर दब गया, जिसमे 25000 से भी अधिक लोग मारे गये. ये प्रशांत महासागर के अग्निकुंड के अंतर्गत आता है. प्रशांत महासागर के अग्निकुंड पर कई सक्रिय ज्वालामुखी उपस्थित है. इसकी ऊँचाई 5,321 मीटर की है. माउंट रिज़ आखिरी बार सन 2016 में विस्फोटित हुआ था. ये एन्डेन वोल्कानिक बेल्ट के उत्तरी ज्वालामुखी जोन का तीसरा सबसे उत्तरी ज्वालामुखी है. एंडेन वोल्कानिक बेल्ट नाजका समुद्री प्लेट और दक्षिणी अमेरिका कॉन्टिनेंटल प्लेट पर स्थित है. ये ज्वालामुखी ऐसे विस्फोटक की श्रृष्टि कर सकता है जिसका प्रभाव ग्लेसिअर पर पड़ सकता है. ये एक प्रकार का कोम्पोसिट ज्वालामुखी है, जो लगभग 200 किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है.

माउंट प्ली (Pelee):-

माउंट प्ली का विस्फोट बीसवीं शताब्दी का सबसे घातक ज्वालामुखी विस्फोट माना गया है. इसका विस्फोटन सन 1902 में हुआ था. ये मार्टिनिक और कैरेब्बियन के एक आयरलैंड पर स्थित है. इसके 1902 के विस्फोट में 30000 लोगों की मृत्यु हो गयी थी. इसकी ऊंचाई 1,397 मीटर की है. इसका अंतिम विस्फोट सन 1932 में हुआ. ये फ़्रांस में स्थित एक कोम्पोजिट ज्वालामुखी है, जिसका निर्माण प्य्रोक्लास्टिक चट्टानों से हुआ है. ये मरिनिक आइलैंड के उत्तरी छोर पर स्थित है, जो लैसर एंटिलेस वोल्कानिक अर्क पर स्थित है. इस आर्क का निर्माण उत्तरी अमेरिका प्लेट और कॅरीबीयन प्लेट के मिलने से हुआ है. 

माउंट क्राकाटोआ(Krakatoa volcano):-

ये इंडोनेशिया में स्थित कम्पोजिट ज्वालामुखी है. सन 1883 में इसके विस्फोट के साथ सुनामी भी आ गयी थी, और लगभग 35000 लोगों की मृत्यु हो गयी. इसकी ऊंचाई 813 मीटर की है. ऐसा माना जाता है कि सन 1883 के विस्फोट के दौरान सबसे अधिक आवाज़ हुई थी. नये इतिहास में ऐसी आवाज़ के ज्वालामुखी के लिए कोई नाम दर्ज नहीं हुआ है. इस समय इसकी आवाज़ इसके उद्गम स्थान से 4800 किमी तक गयी थी. माउंट क्राकाटोआ का आखिरी विस्फोट 31 मार्च सन 2014 में हुआ. क्राकाटोआ आइलैंड जावा और सुमात्रा के मध्य पड़ने वाला सुंडा स्ट्रेट में स्थित है. ये इन्डोनेशियाई आइलैंड आर्क का ही एक हिस्सा है, जो उरेसियन और इंडो- ऑस्ट्रलियाई टेकटोनिक प्लेट पर स्थित है.

माउंट तंबोरा(Mount Tambora):-

ये इंडोनेशिया के ‘100 प्लस’ ज्वालामुखी में से एक है. सन 1815 में हुए इसके विस्फोट का बहुत बुरा प्रभाव पड़ा. इसकी ऊंचाई 2722 मीटर की है. 1815 में होने वाले विस्फोट के बाद इसके आस पास के क्षेत्रों में फसल का विकास रुक गया. कई जगहों पर मौसम परिवर्तन भी देखे गये. इस वर्ष को ‘द इयर विदाउट समर’ के नाम से भी याद किया जाता है. इस विस्फोट में लगभग 90,000 लोगों की मृत्यु हुई थी. माउन्ट तंबोरा में आखिरी बार सन 1967 में विस्फोट हुआ था. ये एक एक्टिवकंपोजिट ज्वालामुखी है.

ज्वालामुखी मंदिर(Jwalamukhi Mandir)

हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा में एक ऐसा शक्तिपीठ है जिसे ज्वाला मंदिर के रूप में जानते हैं लोग। ये एक ऐसा प्रसिद्ध मंदिर है जिसे हर हिन्दू बड़ी श्रद्धा के साथ पूजता है। यहां किसी प्रतिमा की पूजा नहीं की जाती लेकिन फिर लोगों के बीच इसकी मान्यता काफी है। यहां श्रद्धालु चट्टान में से निकली ज्योती की पूजा करते हैं, कहा जाता है कि वो ज्योती अपने आप प्रकट हुई है साथ ही लोगों का मानना है कि वो भगवान की ऊर्जा है जिसे पूजा जाता है। हर मंदिर में जहां भगवान की पूजा दिन में दो बार होती है वहां पूजा करीब पांच बार की जाती है। वहां पर्यटक भी काफी पहुंचते हैं। मान्यता इतनी है कि लोग वहां अपनी मन्नत के लिए भी जाते हैं और वहां पर मन्नत पूरी होने पर दोबारा दर्शन जरूर करते हैं। वो स्थल हिमाचली लोगों के लिए प्राचीन स्थलों में से एक है। हिमाचली लोगों में उस स्थल की मान्यता काफी है।

FAQ

Q : ज्वालामुखी में विस्फोट कब होता है ?

Ans : ज्वालामुखी में पृथ्वी के नीचे से उत्पन होने वाली एनर्जी से होता है विस्फोट।

Q : लावा किसे कहते हैं ?

Ans : लावा ज्वालामुखी से निकला हुआ तरल पदार्थ होता है जिसके कारण आसपास की चीजे भी पिघलने लगती है।

Q : ज्वालामुखी पर बनी फिल्म देखकर आप क्या सिखते हैं ?

Ans : इस तरह की मूवी देखकर आपको ये पता चलता है कि ज्वालामुखी क्या है और कैसे निकलता है इसमें से लावा।

Q : ज्वालामुखी का प्रसिद्ध मंदिर कहां है ?

Ans : ज्वालामुखी का प्रसिद्ध मंदिर हिमाचल के कांगडा में स्थित है।

Q : ज्वालामुखी बिस्पॉट क्या है?

Ans : ज्वालामुखी के फटने के बाद मशरूम के आकार का बादल बनता है इसे बिस्पॉट यह कहते हैं

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