Happy Hanuman Jayanti | हनुमान जयंती |Hanuman Chalisa in Hindi

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How to Read Hanuman Chalisa in Hindi
How to Read Hanuman Chalisa in Hindi

हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa in Hindi) पढ़ने का तरीका जानने के लिए आप हमारे साथ बने रहे बता दें कि हनुमान चालीसा पढ़ने का पवित्र तरीका यह है कि आपको पहले स्नान करना चाहिए और उसके बाद एक शांत जगह पर आप को आसन लगाकर बैठना है उसके बाद हनुमान चालीसा के हर दोहे का उच्चारण आप अपनी मर्जी के मुताबिक कर सकते हैं

क्यों हनुमान जयंती मनाई जाती है:-

हिंदू मान्यताओं के अनुसार भारत में कई वर्षों पहले सारी देवियां आत्मा ने मनुष्य के रूप में इस धरती पर अवतार लिया और इन दिव्य शक्तियां की सहायता से कई दिव्य आत्मा पशु पक्षियों के रूप में धरती पर उन्होंने अवतार ले लिया तत्पश्चात कुछ कथाओं के चलते हनुमान जी का जन्म अलग-अलग युगों में अलग-अलग रूपों में बताया गया है हनुमान जी की चालीसा को हिंदी में आप पढ़ सकते हैं

हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa in hindi)

॥दोहा॥

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥

बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार ।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥

॥चौपाई॥

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥1॥

राम दूत अतुलित बल धामा ।
अञ्जनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥2॥

महाबीर बिक्रम बजरङ्गी ।
कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥3॥

कञ्चन बरन बिराज सुबेसा ।
कानन कुण्डल कुञ्चित केसा ॥4॥
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै ।
काँधे मूँज जनेउ साजै ॥5॥

सङ्कर सुवन केसरीनन्दन ।
तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥6॥

बिद्यावान गुनी अति चातुर ।
राम काज करिबे को आतुर ॥7॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।
राम लखन सीता मन बसिया ॥8॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।
बिकट रूप धरि लङ्क जरावा ॥9॥

भीम रूप धरि असुर सँहारे ।
रामचन्द्र के काज सँवारे ॥10॥

लाय सञ्जीवन लखन जियाये ।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥11॥

रघुपति कीह्नी बहुत बड़ाई ।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥12॥

सहस बदन तुह्मारो जस गावैं ।
अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥13॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।
नारद सारद सहित अहीसा ॥14॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥15॥

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना ।
राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥16॥

तुह्मरो मन्त्र बिभीषन माना ।
लङ्केस्वर भए सब जग जाना ॥17॥

जुग सहस्र जोजन पर भानु ।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥18॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥19॥

दुर्गम काज जगत के जेते ।
सुगम अनुग्रह तुह्मरे तेते ॥20॥

राम दुआरे तुम रखवारे ।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥21॥

सब सुख लहै तुह्मारी सरना ।
तुम रच्छक काहू को डर ना ॥22॥

आपन तेज सह्मारो आपै ।
तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥23॥

भूत पिसाच निकट नहिं आवै ।
महाबीर जब नाम सुनावै ॥24॥

नासै रोग हरै सब पीरा ।
जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥25॥

सङ्कट तें हनुमान छुड़ावै ।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥26॥

सब पर राम तपस्वी राजा ।
तिन के काज सकल तुम साजा ॥27॥

और मनोरथ जो कोई लावै ।
सोई अमित जीवन फल पावै ॥28॥

चारों जुग परताप तुह्मारा ।
है परसिद्ध जगत उजियारा ॥29॥

साधु सन्त के तुम रखवारे ।
असुर निकन्दन राम दुलारे ॥30॥

अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता ।
अस बर दीन जानकी माता ॥31॥

राम रसायन तुह्मरे पासा ।
सदा रहो रघुपति के दासा ॥32॥

तुह्मरे भजन राम को पावै ।
जनम जनम के दुख बिसरावै ॥33॥

अन्त काल रघुबर पुर जाई ।
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥34॥

और देवता चित्त न धरई ।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥35॥

सङ्कट कटै मिटै सब पीरा ।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥36॥

जय जय जय हनुमान गोसाईं ।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥37॥

जो सत बार पाठ कर कोई ।
छूटहि बन्दि महा सुख होई ॥38॥

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।
होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥39॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा ।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥40॥

॥दोहा॥

पवनतनय सङ्कट हरन मङ्गल मूरति रूप ।
राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ॥

Shri Hanuman Ji Ki Aarti: मंगलवार को करें हनुमानजी की आरती

श्री हनुमान जी की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की।

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

जाके बल से गिरिवर कांपे।

रोग दोष जाके निकट न झांके॥

अंजनि पुत्र महा बलदाई।

सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥

दे बीरा रघुनाथ पठाए।

लंका जारि सिया सुधि लाए॥

लंका सो कोट समुद्र-सी खाई।

जात पवनसुत बार न लाई॥

लंका जारि असुर संहारे।

सियारामजी के काज सवारे॥

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।

आनि संजीवन प्राण उबारे॥

पैठि पाताल तोरि जम-कारे।

अहिरावण की भुजा उखारे॥

बाएं भुजा असुरदल मारे।

दाहिने भुजा संतजन तारे॥

सुर नर मुनि आरती उतारें।

जय जय जय हनुमान उचारें॥

कंचन थार कपूर लौ छाई।

आरती करत अंजना माई॥

जो हनुमानजी की आरती गावे।

बसि बैकुण्ठ परम पद पावे॥

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FAQ

Q: हमें हनुमान चालीसा कैसे पढ़नी चाहिए ?

Ans:- हम मंगलवार के दिन सुबह जल्दी उठकर हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए और हनुमान जी के चित्र या प्रतिमा के सामने हमें यह पाठ करना चाहिए ! मंगलवार का दिन हनुमान जी का दिन कहा जाता है हनुमान चालीसा का पाठ 1 से 3 बार करना शुभ माना जाता है पाठ करने से पहले सामने जल भरकर रखें और पाठ पूरा करने के बाद उस जल को ग्रहण कर ले !

Q: हनुमान चालीसा कितने बजे पढ़ना चाहिए ?

Ans:- वैसे तो हनुमान चालीसा पड़ने पर कोई भी पाबंदी नहीं है अगर हम शास्त्रों के अनुसार हनुमान चालीसा पढ़ने के नियमों का वर्णन करें तो इन नियमों के अनुसार हनुमान चालीसा को मंगलवार या शनिवार के दिन शुरू करना चाहिए और अगले 40 दिन तक इसका नियमित पाठ करना चाहिए यह कार्य सुबह सूर्योदय के पूर्व यानी कि सुबह 4:00 बजे शुरू करना होता है

Q: क्या होगा अगर हम तीन बार हनुमान चालीसा पढ़ ले तो ?

Ans:- अगर आप दिन में 3 या उससे ज्यादा बार हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं तो आपके जीवन में आने वाली कठिनाइयों को दूर करता है जितना आप इसे पढ़ते हैं उतना आपकी जीवन में इसका फायदा आपको मिलता है इसके अलावा गाय के देसी घी या तेल का दीया जलाएं तो और एक लोटे में जल भरकर रखें तथा हनुमान जी के सामने तीन बार हनुमान चालीसा का पाठ करें इससे आपको अत्यंत लाभ प्राप्त होगा

Q: हनुमान जी को भोग कैसे लगाएं ?

Ans:- हनुमान जी को आप गुड या बूंदी के लड्डू बनाकर भोग लगा सकते हैं ऐसा अगर लगातार 11 मंगलवार करने से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होते हैं और हनुमान जी आपका जीवन भर साथ निभाती है

Q: क्या स्त्रियां हनुमान चालीसा का पाठ कर सकती हैं ?

Ans:- हिंदुओं के अनुसार हनुमान चालीसा का पाठ महिलाएं व पुरुष कोई भी कर सकता है तथा महिलाएं अगर हनुमान चालीसा संकट मोचन सुंदरकांड आदि का पाठ करती है तो उन की मंगल कामना पूरी होती है

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