हरियाणा के प्रसिद्ध साँगी तथा स्वाँग (Famous Sangi and Swang of Haryana)

स्वाँग (सांग) क्या होता है –

Famous Sangi and Swang of Haryana सांग हिंदी शब्द ‘स्वाँग’ का अपभ्रंश (बिगड़ा हुआ) है। उत्तरी भारत में विशेषकर हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान राज्यों में प्रचलित स्वाँग एक प्रकार की संगीतमय नाटिका होती है| स्वाँग में किसी प्रसिद्ध रूप की नकल की जाती है, जिसमें लोक-कथाओं को लोकगीत, संगीत और नृत्य आदि से नाटकीय रूप देकर प्रस्तुत किया जाता है। स्वांग की शुरुआत करने का श्रेय मेरठ के किशन लाल भट्ट को दिया जाता है |

Famous Sangi and Swang of Haryana
Famous Sangi and Swang of Haryana

यह नकल बहुत जीवंत होती हैं कि इनमें असली चरित्र होने का भ्रम भी हो जाता है। कुछ जातियों और जनजाति के लोग स्वांग करने का कार्य अपनाए हुए हैं और इसी से वे अपनी जीविका अर्जित करते है। जो लोग स्वाँग करने का कार्य करते हैं उन्हे साँगी कहा जाता है|

आधुनिक प्रचार माध्यमों के विकसित हो जाने से लोकनाट्य का यह रूप नगरों से समाप्त हो कर गांवों की ही धरोहर बन कर रह गया है|

हरियाणा के प्रसिद्ध साँगी तथा स्वाँग

इस विधा में हरियाणा के पंडित लखमी चंद का नाम बड़े ही सम्मान से लिया जाता है। उन्होंने अपने जीवन काल में 65 के लगभग प्रसिद्ध सांग लिखे हैं, जिसके कारण उन्हें “सांग-सम्राट” तथा हरियाणा का “सूर्यकवि” कहा जाता है। Click Here

इस पोस्ट में हरियाणा के प्रसिद्ध स्वाँग और साँगी के नाम दिये गए है| ऐसे प्रश्न हरियाणा से संबन्धित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते है| हमें उम्मीद है की दी गई जानकारी आपके काफी हद तक सहायता करेगी |

हरियाणा के प्रसिद्ध साँगी तथा स्वाँग 

Famous Sangi and Swang of Haryana

  • पंडित लखमीचंद – द्रौपदी-चीरहरण, शकुंतला, गोपीचन्द, हरिश्चंद्र, राजा भोज, भरथरी, कीचक विराट, सत्यवान- सावित्री, उरवा अनिरुद्ध व नल- दमयंती इनके मुखी स्वांग रहे |
  • मांगेराम – दुष्यंत- शकुंतला, नवरत्न, ध्रुव भक्त व कृष्ण जन्म इनके मुख्य स्वांग रहे |
  • धनपत सिंह – ज्यानी चोर, पूरणमल, बणदेवी व लीलो-चमन मुख्य स्वांग रहे |
  • बंसीलाल – ध्रुव भक्त, सरवर नीर, राजा नल, गुरु गोगा व राजा गोपीचन्द |
  • अलीबख्श खाँ – अलवर का सिततनामा, नल का छडाव, राजा नल का बगदाव, फिसाना, पद्मावत, अजाइव, महाराजा शिवदान सिंह का बारहमासा, कृष्णलीला, निहालदे, चंद्रवल व गुलाब कावली इनके प्रमुख स्वांग रहे |
  • समरूपचंद – ज्यानी चोर, सरणदे, महाभारत, पद्मावत, रतनसेन, वन पर्व, चीर पर्व, उत्तानपाद व जमाल गबरू
  • अहमद बख्श – कंस लीला, रामायण, चंद्रकिरण नवलदे, सोरठ, चौहान, जयमल पत्ता व गुग्गा |
  • बाजे भगत – ज्यानी चोर, जमाल और चंद्राकिरण |
  • हरदेव – ज्यानी चोर, हीर राँझा व चंद्रकिरण |
  • दीपचन्द – ज्यानी चोर, राजा भोज, नल- दमयंती, हरीशचंद्र, सोरठ, सरणदे व उत्तानपाद |
  • पंडित शंकर लाल – पद्मिनी, भूरा- बादल, मोरध्वज व प्रह्लाद |
  • गोवर्धन सारस्वत – दुल्ले, महाभारत, जसवंत सिंह व कृष्ण लीला |
  • कृष्ण गोस्वामी – दिलावर, बुधामल, बिशनों व गुलबकावली |
  • बालकराम – पूर्ण भक्त, रामायण, कुंजड़ी, शिलांदे व राजा गोपीचन्द |

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